𝄞
सुर ताल लय छंद रस भाव काव्य राग स्वर कलम गीत नाद श्रुति अलाप धुन संगीत तरंग भजन झंकार मधुर
काव्य संग्रह

सुर-ताल
जुगलबंदी...काव्य

Gitanjali Saxena · Poetry Collection

शब्दों को भी पहचान तब मिली,

जब पिरोया तराशा कलम ने उन्हें

शब्द तो आम ही थे, खास तब होते,

जब बिखरे पन्नों पर, कवि कलम से..

In essence

A collection of brief, luminous verses — each a flash of insight, a moment frozen in language. Gitanjali Saxena's kshanikayen (flash poems) are small in form but vast in feeling.

24 कविताएं
2022–2025 काव्य-यात्रा
भाव
काव्य संग्रह

गीतांजलि सक्सेना की काव्य-रचनाओं का संग्रह — क्षणिकाएं, भावगीत, जीवन-दर्शन और स्मृतियों से जन्मी कविताएं। हर रचना एक अनुभव, हर शब्द एक सफर।

01
लॉकडाउन...
PDF पढ़ें
02
पति देव...
PDF पढ़ें
03
अनमोल है...
PDF पढ़ें
04
होली आई रे...
PDF पढ़ें
05
सौगंध...
PDF पढ़ें
06
विचित्र लीला...
PDF पढ़ें
07
कदर-ए-कीमत...
PDF पढ़ें
08
मौका-ए-दस्तूर...
PDF पढ़ें
09
ख्वाहिशें-ए-जिन्दगी...
PDF पढ़ें
10
जीवन सार...
PDF पढ़ें
11
कोविड क्लब...
PDF पढ़ें
12
शुभकामनाएँ...
PDF पढ़ें
13
लाड़ली...
PDF पढ़ें
14
ज्योति...
PDF पढ़ें
15
महारानी एक दिन की
PDF पढ़ें
16
World of Magic
PDF पढ़ें
17
शब्दों की शक्ति परीक्षा
PDF पढ़ें
18
आबरा का डाबरा
PDF पढ़ें
19
हर दिन नया सवेरा
PDF पढ़ें
20
क्षणिकाएं
PDF पढ़ें
21
रहस्यमय दुनिया
PDF पढ़ें
22
मिट्टी के रंग...
PDF पढ़ें
23
बदले-बदले है हजूर
PDF पढ़ें
24
डिलीवरी मैन
PDF पढ़ें
नया काव्य संग्रह · Latest Poetry Collection
हर पल काव्य नवरस — Latest Poetry Collection
कविता पढ़ने के लिए place card पर click करें।
हर पल नवरस · नई कविता

समुद्र मंथन

जीवन दर्पण
सागर की लहरों सा बहता, जीवन का यह सफ़र...
कभी शांत, कभी उग्र, बस बहता निरंतर बेमिसाल,
हवा के झोंकों संग गुनगुनाती, तट से टकराती लहरें,
भँवरों में उलझी पीड़ा में भी, रहे मौन, करें सवाल।
सागर गहराइयों में ही छिपा है रत्नों का अपार भंडार,
जहाँ विष और अमृत दोनों को अपनाया उसने हर बार,
अनजानी लहरें, तट टकराती तरंगें, सुनाए जीवन ज्ञान,
मानों आशाओं से है भरा, कोई अनकहा दर्शन विचार।
निःसंकोच समाये है.. प्राणियों को बिन भेदभाव के,
प्रमाणित करें विशालता, हर मिसाल ही जीवन दर्पण,
उतार-चढ़ाव इसकी प्रकृति, यही जीवन चक्र का सार,
सुबह का सूरज, दे बल उत्सर्जन पर, यही प्रकृति नियम,
नव आशाओं की दस्तक से, तरंगी उमंगें पुनः जाग उठें,
खुशियों भरे रंगों से सजाए जीवन के अधूरे कोरे कैनवस,
दुर्गम पथों पर लक्ष्य हासिल, दे कराए, विवेक पूर्ण चयन,
कुछ यादें लौटें, ना लौटें, फिर भी सिखा जाए अपनापन।
राहें न भटकते, राहगीर का संघर्ष ही, उसका सबसे बड़ा रण,
दुर्लभ पथ हो कठिन सही, पर होता कुछ असंभव कभी नहीं,
नियति के खेल की समझ ही, तो खुद की पहचान दे कराए,
करें प्रार्थना, अठखेलियाँ करती, उन लम्हों की तट वापसी,
जीवन मंथन में प्रयत्नशील रहने में छिपें है जटिल उपाय,
जीवन की गहराइयों से निकला अमृत ही है ‘ईश्वरीय वरदान’
जब जागो तब सवेरा...यही प्रकृति नियम, यही जीवन सत्य।
— गीतांजलि सक्सेना · 2026
एक अलग दिन · A Different Day

एक अलग दिन

A Different Day · Red Glowing Sun
Don’t let that glowing light fade,
Life wears rainbows, beautifully made.
Moments may pass, moments may fly,
Yet treasured memories never die.
Hold them close, with love’s embrace,
Relations bloom in a sacred space.
Each step may carry trials unknown,
Yet your resolve has brightly shone.
The pride of success, the joy in your eyes,
Reflects the truth of how high you rise.
The road was rough, the journey long,
Yet wisdom and courage made you strong.
Success is born from steady will,
From dreams you chased with passion still.
You shaped your name, your identity,
And filled our hearts with dignity.
God’s blessings walk beside your way,
Guiding your steps every day.
May every dream you hold come true,
Our prayers will always follow you.
In every bond, you stand sincere,
With honest heart and vision clear.
You read emotions through the eyes,
A rare gift, gentle and wise.
With generous soul and caring art,
You touch each life, you touch each heart.
A model, an example, precious and true,
Our lives feel richer because of you.
Every joy, every reason we live,
Begins with all the love you give.
May success and happiness forever run,
As you shine bright — our red glowing sun.
Our blessings stay, forever near,
With endless love, year after year.
— 7th January 2026
कथनी और करनी · न्यायसंगत

कथनी और करनी

आत्मसम्मान और रिश्तों का संतुलन
हिचकोले लेती नौका, पतवार दिशाहीन,
विचलित मन है खड़ा जीवन पड़ाव में।
हुईं चूक रिश्ते बुनाई, उन्हें संजोने में,
मोतियों में पिरोए ‘रिश्ते’ की खूबसूरती।
स्नेह व विश्वास डोर — जाल में उलझी,
जाने कैसे अनमोल बंधन, रास्ते भटके।
सोच-समझ हुई विफल, भावनाएं आहत,
डगमगाते रिश्ते, सही-गलत पैमाने झूठे।
खाली हाथ, है भावनाओं से भरे खजाने,
असमंजस में खड़ा अनुभव, ‘कटघरे’ में।
जीवन संघर्ष समिति — ‘एकमात्र सदस्य’,
अनजाने में सही, मापदंड हुए विफल।
विरोधाभास घेरे अब तोड़ना है जरूरी,
प्रश्नों के उत्तर जानने को मन उत्सुक।
शब्द हलके में कतई न्यायसंगत नहीं,
दुख पीड़ा हो जब भावनाएँ निरादर हों।
कैसा चक्र, जब रिश्तों की चमक हो धूमिल,
प्राप्त हर दायित्व रहा ईश्वरीय वरदान।
ईश्वर साक्षी, किए हर प्रण-वादे निभाए,
पूर्ण निष्ठा, वचनबद्धता से उन्हें सींचा।
फिर क्यों? धर्म-संकट में बेवजह उलझे!
न चाहा मान-सम्मान, रिश्ते रहे प्रमुख।
आत्मसम्मान भी है मौलिक अधिकार,
जुड़े रिश्तों में व्यक्तिगत मोल न रहा।
‘अस्तित्व’ की खोज रहेगी जारी हमेशा,
परिस्थिति से लड़ने का साहस है बाकी।
गुम है दूरियां पटाने के अचूक उपाय,
सकारात्मक दिल फिर भी मानता नहीं।
कथनी व करनी का संतुलन अभी ‘शेष’
— गीतांजलि सक्सेना · 2026
मेरे हमदम मेरे दोस्त · नई कविता

मेरे हमदम मेरे दोस्त

रिश्तों का अनमोल उपहार
फूलदान और फूलों की तस्वीर
आज सुबह की पहली किरण कुछ अनोखी निराली,
क्षितिज पर रंगों का मिलन, अद्भुत प्रकृति लीला,
लुभावनी रूहानी प्रक्रिया, भाव विभोर आशाएं भरी,
बुनेंगे सपने साथ-साथ, रंगोली से दे सजाएं संसार।
निभाये है हमेशा, किए हर एक वादे, एक दूजे से,
सुकून, हौसला है देती, हर एक लम्हों की मधुर यादें,
हर पड़ाव में है मिली हमें, अनेक खुशियाँ बेपनाह,
चुनौती से न डरे, किया सामना, राहें सरल दे बनाई।
जीवन के हर क्षण में, ईश्वर भी रहे कृपालु हमेशा,
हंसी खुशी यूँ ही चलता रहे, जिंदगी का यह सफर,
ईश्वर ने नवाजा, मिली उपाधि, दादा-दादी इसी दौर में।
सस्नेह डोर में यूं ही बंधे रहे, न टूटे रूठने-मनाने का सिलसिला,
चाय कप चुस्की, कभी नुक्कड़, आसमान तले, बयान करें ‘जज़बात’
कभी न छूटे साथ हमारा, बने रहना यूँ ही ‘दोस्त’ ऐसे ही हमसफर।
नया साल पर करें यह प्रण, हमारा स्वस्थ शरीर ही है ‘सच्चा मित्र’
शब्दों की ताकत बेमिसाल, भरे दामन खुशियां बेशुमार।
प्रार्थना में रहे हमेशा, ढेर सारी शुभकामनाएँ जन्मदिन पर,
‘नया साल’ खुशियों का भंडार, दे भरे काया सुख जीवन में।
‘जीवन के हर पल हो रंगारंग पचास हजार
यही रिश्तों का अनमोल उपहार’
— गीतांजलि सक्सेना · 2026
प्रिय अनूप · जन्मदिन शुभकामना

प्रिय अनूप

नई उड़ानें, नया दौर, आशीर्वाद
प्रिय अनूप जन्मदिन और retirement शुभकामना
यह जन्मदिन दोहरी खुशी उमंग भरा,
नई उड़ानें पंख फैलाए अरमानों भरी,
सेवानिवृत्ति नए आयामों की खोज घड़ी
है सिर्फ प्रक्रिया तहत कार्यक्षेत्र विश्राम।
न ही किसी राह अन्त, है खुला हाईवे,
जीवन धारा हर पड़ाव भिन्न अनोखा
प्रकृति नियम, सपने पिरोने, नया दिन
दिन-रात मेहनत का मिला सम्मान।
हर उतार-चढ़ाव में निभाई जिम्मेदारी
रिश्ते बखूबी निभाना, बसा स्वभाव में
अति संवेदनशील पारी सफलताओं भरी
याद सब पल खुशियों भरें साथ हमारा।
जीवन रंगों सजा हाथ थामें सफर यही
परिवार में सब का चहेता, पापा मां.. दुलारा,
कर्तव्यपरायण की सही मिसाल
विरासत में हासिल है जीने-का-अंदाज।
यह जन्मदिन खास नए दौर की ओर
है आशीर्वाद और दुआएं हम सब की,
सफलताएं बिखरे राहों में, इस दौर में,
जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएं।
— गीतांजलि सक्सेना · 2026
और पढ़ें
गु
संस्मरण
शाश्वत... शिक्षकों को नमन
गुरु का स्थान जीवन में सबसे ऊँचा — शिक्षकों को समर्पित एक भावपूर्ण संस्मरण।
मा
कविता
मम्मी, अम्मा, नानी... जीवन सफ़र
माँ के अनगिनत रूपों की कहानी — हिम्मत, विश्वास और अनमोल जीवन की पहचान।
या
कविता
यादों में रहेंगे बसे...
बीते पलों की स्मृतियाँ — जो यादों में हमेशा जीवित रहती हैं।
Visitors