कविता

नववर्ष पर
शब्दों की भेंट

शब्दों का मोल जीवन में जानें…

जनवरी २०२६
BAPS Hindu Mandir Abu Dhabi — एक कमल मरुस्थल में
In essence

A new year's gift of words — a poem about health, joy, language and human connection. Gitanjali Saxena reminds us that words, like seeds, carry infinite potential for a new beginning.

नववर्ष भरा रहे अच्छे स्वास्थ्य से, सुख-समृद्धि दे दस्तक जीवन में, आज मौका भी है उसका दस्तूर भी शब्द पिरोकर कुछ कहने-सुनने का, जीवन ही तो है उत्सव, है अनमोल,
कामनाएँ होती पूरी तो कामयाबी भी, वक्त चाहे न दिखे बहुत सीख दे जाए छोड़ गिलें शिकवे शुक्रिया अदा कीजिए आज का आनंद ही, यही जीवन सार,
जन्म से मृत्यु तक अक्षरों से है बंधा, जादुई ढाई अक्षर स्नेह तो भाग्य भी, यही तो है जो दिल को दिल से जोड़े
आशिक़ और आशिक़ी परिभाषित करें रिश्तों अहमियत बस शब्द ही जाने, शब्द भाषाओं में भावनाओं के सार में। अनकहे शब्द भी, बहुत कुछ कह जाए, शब्दों की ताक़त समझे न ले हल्के में
इनमें युद्ध ललकार तो फटकार भी है कभी मरहम बनकर घाव यह सहलाए।
सुर शब्दों में डालें तो मधुर गीत बने, घुंघरू की झंकारें घोले मिश्री कानों में, नवरस भाव बिन अक्षर रहे सब फीके, इसकी ताक़त को जाने न ले हल्के से
शब्दों में ही छुपा है ईश्वर का स्वरूप रचाए गीता रामायण, कुरान, बाइबल करें प्रार्थना, नमस्कार आशीर्वाद भी दे, जीवन आधार यही, है सृष्टि का मूल।
न ले हल्के से, अमृत का भंडार यही, उतार-चढ़ाव दिखाए, तो सोच दिशा भी, संकल्पों में ऊर्जा रंग भी शब्द ही भरें, फूलों की नहीं रोज़ शब्दों की वर्षा करें, ऊसी है इसकी दुनिया निराली अद्भुत।
शब्दों का मोल जीवन में जानें…
गीतांजलि सक्सेना — जनवरी २०२६

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