Thoughts that descended from the pen. A collection of reflections on writing, language and the sacred act of putting feeling into words — by a poet who has never stopped believing in the power of ink.
"शब्दों के बिछाए चक्रव्यूह में घुसने का दुस्साहस सिर्फ कलम ही तो कर सकती है।"
लेखन एक ऐसी साधना है जो कभी पूरी नहीं होती। हर नया शब्द एक नई यात्रा है, हर नई पंक्ति एक नया अन्वेषण।
कलम जब चलती है, तो सिर्फ स्याही नहीं बिखरती — भावनाएं बिखरती हैं, विचार बिखरते हैं, और कभी-कभी आत्मा भी।
लिखना एक जिम्मेदारी है। जो कलम से उतरता है, वो पाठक के दिल में उतरता है। इसलिए हर शब्द सोच-समझकर लिखना चाहिए।
मैंने जब पहली बार कलम उठाई थी, तब नहीं जानती थी कि यह रिश्ता इतना गहरा हो जाएगा। आज कलम मेरी पहचान है, मेरी आवाज़ है।
यह लेख उन सभी लेखकों के लिए जो शब्दों के साथ अपनी यात्रा जारी रखे हुए हैं — क़लम से उतरे, दिल से उतरे।
— गीतांजलि सक्सेना, जून २०२२